सांसद वर्मा ने प्रिस्टीन मेगा फुड पार्क का किया निरीक्षण, कहा बेहतर करने की आवश्यकता

 

मुख्य पार्षद प्रतिनिधि ने भी कराया मेगा फुड पार्क समस्याओं से अवगत

 

कहा गोदाम के अलावे फुटी कोड़ी बनकर रहा गया है प्रिस्टीन मेगा फुड पार्क

 

ब्यूरो रिपोर्ट

खगड़िया। भारत सरकार के खाध- प्रस्सकरण मंत्री चिराग पासवान के आदेश पर मानसी में बने मेगा फुड पार्क का निरीक्षण करने आया हुं। उक्त बातें खगड़िया सांसद राजेश वर्मा ने मानसी प्रिस्टीन मेगा फुड पार्क के निरीक्षण करने के बाद कहा। सांसद ने प्रिस्टीन मेगा फूड पार्क सभी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और गोदामों का निरीक्षण किया। सांसद ने मेगा फूड पार्क के कर्मियों से बात कर वस्तुस्थिति की जानकारी लिया। वर्मा ने बताया कि प्रिस्टीन फूड मेगा पार्क खगड़िया के लिए एक बहुत बड़ी योजना है। यह किन कारणों से अधूरा रह गया है उन कारणों को जानने को लेकर ही निरीक्षण किया गया है। ताकि इसके बाद वस्तुस्थिति की सही जानकारी हम खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान को दे सके और यह सुनिश्चित कर सकें कि जल्द से जल्द इसकी शुरुआत हो सके। वर्मा ने कहा प्रिस्टीन मेगा फुड पार्क बहुत बड़ी परियोजना है, लेकिन आधी- अधुरे कार्य क्षेत्र के लोगों की सपनों को छीन रहा है। जो दुख की बात है। वर्मा ने कहा खगड़िया लोकसभा क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो, जिससे यहाँ के किसानों और युवाओं को अधिकतम लाभ मिल सके। इस दिशा में हम सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रिस्टीन मेगा फूड पार्क को सुचारू रूप से शुरू करना हमारे विज़न का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल हमारे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में सहायक होगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सुनिश्चित करेगा। सांसद ने कहा की प्रिस्टीन मेगा फूड पार्क की स्थापना का मुख्य उद्देश्य हमारे किसानों को उनकी फसलों के प्रसंस्करण और विपणन में सहायता प्रदान करना था। जो अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है।वहीं निरीक्षण के दौरान मानसी नगर पंचायत के मुख्य पार्षद प्रतिनिधि आयुष कुमार उर्फ गोलू सिंह ने प्रिस्टीन मेगा फुड पार्क के समस्याओं एवं खामियों से सांसद को अवगत कराया। अपने लिखित पत्र सौपतें हुए आयुष ने बताया की मानसी मेगा फूड पार्क स्कीम के तहत बना था जिसे 2016 तक पूरा कर लेना था।लेकिन 2018 में भी इसका उद्घाटन नहीं हो सका। तत्कालीन खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बिना उद्घाटन किए हुए वापस हो गई। इसमें भारत सरकार का 35% एवं राज्य सरकार का 15℅ प्रतिशत का अनुदान प्राप्त है।लेकिन कंपनी केवल गोदाम बनाकर गोदाम का किराया वसूल रही है,और यहां पर मुर्गी दाना के अलावा किसी भी तरह का कोई खाद्ध प्रसंस्करण उद्योग अभी तक नहीं लगा है‌। वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार का झांसा देकर अभी तक एक भी स्थानीय लोगों को कंपनी अपनी रोल पर नहीं रखी है पुराने जितने कामगार थे सब को कंपनी निकल चुकी है‌। 70 एकड़ में खाद्य प्रसंस्करण संबंधित उद्योग लगना था और 28.3 एकड़ में रेल परियोजना लगना था रेल परियोजना का अभी तक कुछ भी नजर नहीं आ रहा है‌। 2015 में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने इसका शिलान्यास रखा था और लक्ष्य 2016 तक का रखा था लेकिन अभी तक धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। वहां काम कर रहे हैं मजदूरों से भी कमीशन खोरी किया जाता है।निरीक्षण के दौरान मौके पर जद यू जिला अध्यक्ष बबलू मंडल, भाजपा जिला अध्यक्ष शत्रुघ्न भगत, लोजपा जिला अध्यक्ष शिवराज यादव एवं मानसी मंडल भाजपा अध्यक्ष राजाराम सिंह, जद यू प्रखण्ड अध्यक्ष राजनीति सिंह सहित दर्जनों एनडीए गठबंधन के कार्यकर्ता मौजूद थे।

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